हर फूल से हर कली से

 

हर फूल से हर कली से,
निवेदन मेरा गली-गली से-
डाल डाल से, पात पात से,
हर मज़हब से, हर जात से,
कल कल करते नदी नहर से,
गाँव गाँव से, शहर शहर से,

बस वही सूने मुझको,
जिनके अंदर स्वाभिमान है |
नाम हिन्दुस्तानी जिसका,
मज़हब हिन्दुस्तान है |

क्योंकि मत भूलो
मंदिर-मस्जिद-गिरजा हिन्दुस्तान है |
यही तो हम सब के लिए
यारों हमारा अभिमान है |

क्या हज या तीर्थस्थल पर
कूड़ा फूंक के आते हो ?
या फिर अपने पूजा घर में
पान थूंक के आते हो ?

यदि निकले सफाई करने
संकल्प कड़ा मने हम
कचरा उठाने की शर्मिंदगी से
देश बड़ा माने हम
निकल पड़ा था दांडी तक जो,
वापस वही उमंग चले
गली गली से बछ्छ बच्चा बच्चा
हाथ मिलाकर संग चले |
साफ हिन्द की चाह में
हर सफे पर कलम चले |

और भारत स्वच्छ बनाने हेतु,
कदम मिलाकर हम चले |
और भारत स्वच्छ बनाने हेतु,
कदम मिलाकर हम चले |

दिखला दे अब दुनिया को,
भारत आशावादी है
हर दिलमें अमर तिरंगा,
धड़कन में महात्मा गाँधी है |

नालियों की गोद से, माँ गंगा के प्रवाह तक,
“स्वच्छ भारत” अभियान चले,
उठाके झाड़ू हाथ में,
पूरा हिन्दुस्तान चले |

(A young student of Nainital’s Sherwood School, Amitabh Bachchan’s alma mater, recites an inspiring poem on cleanliness. His poem and oratory skills impressed one and all, especially the actor and campaign ambassador)

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