वोही मर्द है…

जिसकी आंखोमे है जगमगाती हुई जैसे गहरी शराफत की इक रोशनी
जिसके अंदाज़ में एक तहज़ीब है
जिसके लहजे में नरमी है
शब्दोमे तमीज़ है
जिस के दिल में भी और जिसकी बातो में भी
औरत के वास्ते पूरी इज्जत भी है पूरा आदर भी है
जिसको औरत के तन मन का,जीवन का सम्मान है
औरत के आत्म सम्मान का,जिसको हर एक पल ध्यान है
जो कभी एक पल भी नहीं भूलता औरत इन्सान है
जिसको अपनी भी पहचान है
जिसमे शक्ति भी है
जिसमे हिम्मत भी है
जिसमे गौरव  भी है,आत्म-विश्वास है
जो अगर साथ है
जो अगर पास है
उसके होने से औरत को अपनी सुरक्षा का एहसास है
वोह जो औरत का एक सच्चा साथी है,इक दोस्त है,इक हमदर्द है 
सच तो यह है
“वोही मर्द है”
~ फरहान अख्तर

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